Search This Blog
इस बार आकाशदेव पूरी प्रसन्नता के साथ बोले,"धन्य है यह राष्ट्र और माता-पिता पूत्र! जहां और जिन्होंने तुम जैसे स्वाभीमानी पुत्र का जन्म दिया। आज तुम इस श्रृष्टि के सत्य से परिचित हो गए कि मानव धर्म हीं सर्वश्रेष्ठ धर्म है और कर्म के सत्य से भी परिचित हो गए कि बिना किए कुछ नहीं मिलता है। परंतु कर्म करने से नहीं पाप होता है और न हीं पुण्य बल्कि जैसा काम किया जाता है, उसका तुरंत हीं वैसा परिणाम मिलता है। आज तुमने जीवन के श्रेष्ठ पद 'मनुष्यतव' को प्राप्त कर लिया है।"
Posts
Showing posts from 2019